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स्थानीय ज्ञान से डिजिटल ज्ञान तक: ग्रामीण भारत में सामुदायिक ज्ञान-विशेषज्ञों के सामाजिक प्रभाव में हो रहे परिवर्तन का अध्ययन
Author(s): Prof. Alqama Qureshi

Abstract
ग्रामीण भारत में ज्ञान का निर्माण और प्रसार लंबे समय से सामुदायिक संबंधों अनुभव और स्थानीय विशेषज्ञता पर आधारित रहा है। किसान कारीगर बुजुर्ग शिक्षक पारंपरिक चिकित्सक लोक कलाकार और अन्य अनुभवी व्यक्ति अपने-अपने समुदायों में ज्ञान के महत्वपूर्ण स्रोत रहे हैं। डिजिटल तकनीक के विस्तार विशेषकर स्मार्टफोन इंटरनेट सामाजिक माध्यम और ऑनलाइन सूचना मंचों के प्रसार ने इस पारंपरिक ज्ञान-व्यवस्था के स्वरूप को बदलना शुरू कर दिया है। प्रस्तुत शोध-पत्र ग्रामीण भारत में स्थानीय ज्ञान से डिजिटल ज्ञान की ओर हो रहे संक्रमण तथा सामुदायिक ज्ञान-विशेषज्ञों के सामाजिक प्रभाव में आने वाले परिवर्तनों का समाजशास्त्रीय अध्ययन करता है। अध्ययन गुणात्मक द्वितीयक-स्रोत एवं व्याख्यात्मक पद्धति पर आधारित है और ज्ञान के समाजशास्त्र सामाजिक पूँजी स्थानीय ज्ञान डिजिटल विभाजन तथा तकनीकी मध्यस्थता से संबंधित साहित्य का विश्लेषण करता है। अध्ययन से संकेत मिलता है कि डिजिटल माध्यम सामुदायिक विशेषज्ञों को पूरी तरह विस्थापित नहीं कर रहे बल्कि उनके सामाजिक प्रभाव को पुनर्गठित कर रहे हैं। ज्ञान की उपलब्धता व्यापक हुई है परंतु ज्ञान की स्थानीय संदर्भगत विश्वसनीयता का महत्व बना हुआ है। भविष्य की ग्रामीण ज्ञान-व्यवस्था में डिजिटल संसाधनों और सामुदायिक विशेषज्ञता के बीच सहयोग स्थापित करना आवश्यक है।