कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर निर्भरता और मानवीय स्वायत्तता: भारतीय युवाओं के दैनिक निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में हो रहे सामाजिक परिवर्तन का अध्ययन
Author(s): Dr. FaizanAbstract
कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित डिजिटल प्रणालियों का विस्तार भारतीय युवाओं के दैनिक जीवन में निर्णय लेने की प्रक्रियाओं को तेजी से प्रभावित कर रहा है। अध्ययन खरीदारी यात्रा मनोरंजन समय-प्रबंधन करियर सामाजिक संचार और व्यक्तिगत विकल्पों से संबंधित अनेक निर्णय अब डिजिटल सुझावों खोज प्रणालियों और संवादात्मक कृत्रिम बुद्धिमत्ता की सहायता से लिए जा सकते हैं। प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य यह समझना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर बढ़ती निर्भरता मानवीय स्वायत्तता निर्णय क्षमता और व्यक्तिगत उत्तरदायित्व के सामाजिक अर्थ को किस प्रकार पुनर्गठित कर रही है। अध्ययन गुणात्मक द्वितीयक-स्रोत एवं व्याख्यात्मक पद्धति पर आधारित है तथा स्वायत्तता तर्कसंगत निर्णय तकनीकी मध्यस्थता डिजिटल निर्भरता और एल्गोरिदमिक शासन से संबंधित साहित्य का विश्लेषण करता है। अध्ययन से संकेत मिलता है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता निर्णय लेने की गति और विकल्पों की उपलब्धता बढ़ा सकती है लेकिन अत्यधिक निर्भरता व्यक्ति के स्वतंत्र विचार विकल्पों की आलोचनात्मक तुलना और निर्णय के प्रति व्यक्तिगत उत्तरदायित्व को प्रभावित कर सकती है। विशेष रूप से तब समस्या उत्पन्न होती है जब तकनीकी सुझाव को निष्पक्ष या वस्तुनिष्ठ समझ लिया जाता है। इसलिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता को निर्णय का अंतिम प्राधिकारी बनाने के बजाय निर्णय-सहायक के रूप में उपयोग करना अधिक उपयुक्त है। भविष्य की डिजिटल संस्कृति में स्वायत्तता का अर्थ तकनीक से स्वतंत्र रहना नहीं बल्कि तकनीकी सहायता के बावजूद अंतिम निर्णय पर मानवीय नियंत्रण बनाए रखना होगा।