डेटा-वंचना के रूप में सामाजिक वंचना: डिजिटल युग में गरीबी और असमानता की पुनर्व्याख्या
Author(s): Dr. Darsh GuptaAbstract
डिजिटल तकनीकों के विस्तार ने गरीबी असमानता और सामाजिक वंचना की पारंपरिक समझ को बदल दिया है। शिक्षा रोजगार स्वास्थ्य बैंकिंग सामाजिक सुरक्षा और सरकारी सेवाएँ तेजी से डिजिटल माध्यमों पर निर्भर हो रही हैं। इसलिए इंटरनेट डिजिटल उपकरण कौशल और विश्वसनीय डेटा तक पहुँच सामाजिक तथा आर्थिक भागीदारी की आवश्यक शर्त बन गई है। इस संदर्भ में डेटा-वंचना को केवल सूचना की कमी नहीं बल्कि सामाजिक वंचना के नए रूप के रूप में समझना आवश्यक है। यह अध्ययन अमर्त्य सेन के क्षमता दृष्टिकोण डिजिटल विभाजन सामाजिक बहिष्करण और डिजिटल नागरिकता के आधार पर विश्लेषण करता है कि डिजिटल संसाधनों और डेटा-आधारित सेवाओं तक असमान पहुँच गरीबी और असमानता को कैसे बढ़ाती है। गुणात्मक और वैचारिक पद्धति पर आधारित यह अध्ययन द्वितीयक साहित्य और संस्थागत रिपोर्टों का उपयोग करता है। इसका तर्क है कि डेटा तक पहुँच उसकी समझ और उपयोग की क्षमता सामाजिक अवसरों को प्रभावित करती है। તેથી डिजिटल समावेशन में डेटा-साक्षरता अधिकार गोपनीयता और पारदर्शिता शामिल होनी चाहिए।