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प्रतीक्षा की राजनीति: सार्वजनिक सेवाओं तक पहुँच में समय नौकरशाही और सामाजिक असमानता का समाजशास्त्रीय अध्ययन
Author(s): Prof. Bhuvi Roy

Abstract
आधुनिक कल्याणकारी राज्य में शिक्षा स्वास्थ्य पेंशन राशन रोजगार और सामाजिक सुरक्षा जैसी सार्वजनिक सेवाओं तक पहुँच सुनिश्चित करना राज्य की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। किंतु इन सेवाओं की उपलब्धता केवल पात्रता और अधिकार पर निर्भर नहीं करती बल्कि यह भी महत्वपूर्ण है कि नागरिकों को सेवा कितने समय में प्राप्त होती है। आवेदन सत्यापन दस्तावेज़ों की जाँच कार्यालयों के चक्कर डिजिटल प्रक्रियाएँ और शिकायत निवारण गरीब तथा कमजोर समूहों के लिए अतिरिक्त बोझ बन सकते हैं। ‘प्रतीक्षा की राजनीति’ इसी बात का विश्लेषण करती है कि प्रशासनिक समय सामाजिक शक्ति वर्गीय स्थिति और संस्थागत असमानता से कैसे जुड़ता है। यह अध्ययन अमर्त्य सेन के क्षमता दृष्टिकोण मैक्स वेबर की नौकरशाही तथा सामाजिक बहिष्करण की अवधारणाओं के आधार पर सार्वजनिक सेवाओं का अध्ययन करता है। गुणात्मक और वैचारिक पद्धति के अंतर्गत द्वितीयक साहित्य तथा संस्थागत रिपोर्टों का उपयोग किया गया है। मुख्य तर्क यह है कि प्रतीक्षा तटस्थ प्रक्रिया नहीं है। संसाधन सूचना परिवहन और डिजिटल सुविधा से संपन्न नागरिक प्रतीक्षा को आसानी से सहन कर लेते हैं जबकि गरीब ग्रामीण महिलाएँ वृद्ध और असंगठित श्रमिक आय अवसर और सम्मान की हानि झेलते हैं।