डिजिटल कल्याण से डेटा-नागरिक तक: कल्याणकारी राज्य में नागरिक की बदलती सामाजिक पहचान का अध्ययन
Author(s): Prof. PranavAbstract
डिजिटल तकनीक ने कल्याणकारी राज्य और नागरिक के संबंधों को गहराई से बदल दिया है। पारंपरिक व्यवस्था में नागरिक की पहचान अधिकार पात्रता सामाजिक स्थिति और राज्य के साथ संस्थागत संबंधों के आधार पर निर्धारित होती थी जबकि डिजिटल शासन में यह डेटा डिजिटल पहचान ऑनलाइन अभिलेख बायोमेट्रिक जानकारी और एल्गोरिद्मिक प्रक्रियाओं से भी निर्मित होती है। इस परिवर्तन के कारण नागरिक केवल योजनाओं का लाभार्थी न रहकर ‘डेटा-नागरिक’ बन रहा है जिसकी पात्रता और सामाजिक दृश्यता डिजिटल रिकॉर्ड पर निर्भर हो सकती है। यह अध्ययन अमर्त्य सेन के क्षमता दृष्टिकोण टी. एच. मार्शल की नागरिकता अवधारणा और मिशेल फूको के निगरानी संबंधी विचारों के आधार पर नागरिक की बदलती सामाजिक पहचान का विश्लेषण करता है। गुणात्मक एवं वैचारिक पद्धति पर आधारित यह अध्ययन द्वितीयक स्रोतों का उपयोग करता है। डिजिटल कल्याण सेवाओं की पहुँच लक्षित वितरण और प्रशासनिक दक्षता बढ़ा सकता है लेकिन गलत डेटा डिजिटल विभाजन तकनीकी अशिक्षा और गोपनीयता संबंधी जोखिमों के कारण वंचना भी उत्पन्न हो सकती है। अतः डेटा-नागरिकता को पारदर्शिता डेटा-सुरक्षा मानवीय निगरानी अपील डेटा-सुधार और डिजिटल समावेशन से जोड़ना आवश्यक है।