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स्वचालित समाज में मानवीय क्षमता: कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में स्वतंत्रता एजेंसी और विकास की पुनर्व्याख्या
Author(s): Dr. Garima

Abstract
कृत्रिम बुद्धिमत्ता और स्वचालन के विस्तार ने विकास स्वतंत्रता और मानवीय क्षमता की पारंपरिक अवधारणाओं को नए सिरे से समझने की आवश्यकता उत्पन्न की है। शिक्षा स्वास्थ्य रोजगार प्रशासन और संचार जैसे क्षेत्रों में स्वचालित प्रणालियाँ निर्णय लेने तथा अवसरों के वितरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इससे कार्यक्षमता और सुविधा बढ़ने के साथ-साथ नई सामाजिक असमानताएँ रोजगार असुरक्षा निगरानी और तकनीकी निर्भरता भी विकसित हो रही हैं। यह अध्ययन अमर्त्य सेन के क्षमता दृष्टिकोण के आधार पर विश्लेषण करता है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में व्यक्ति की वास्तविक स्वतंत्रता और एजेंसी किस प्रकार प्रभावित हो रही है। अध्ययन में गुणात्मक एवं वैचारिक पद्धति के माध्यम से द्वितीयक साहित्य पुस्तकों तथा संस्थागत रिपोर्टों का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन का मुख्य तर्क है कि तकनीकी प्रगति को वास्तविक विकास तभी माना जा सकता है जब वह व्यक्ति की क्षमताओं निर्णय लेने की स्वतंत्रता गरिमा अवसरों और सामाजिक भागीदारी को मजबूत करे तथा तकनीक मानव स्वायत्तता का विकल्प न बने।