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फेक न्यूज़ राजनीतिक प्रचार और लोकतांत्रिक विमर्श: भारतीय मीडिया की भूमिका (2018–2022)
Author(s): डॉ. मनीषा तोमर, प्रो. मीना चरांदा

Abstract
डिजिटल मीडिया के तीव्र प्रसार ने सूचना के प्रवाह को जितना तेज़ किया है उतना ही असत्य और विकृत समाचारों के प्रसार को भी बढ़ावा दिया है। 2018 से 2022 के बीच भारतीय जनतंत्र में फेक न्यूज़ और राजनीतिक प्रचार ने सार्वजनिक विमर्श को गहराई से प्रभावित किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म विशेष रूप से व्हाट्सऐप और ट्विटर अब केवल संवाद के माध्यम नहीं रहे बल्कि वे राजनीतिक मतनिर्माण के सशक्त उपकरण बन चुके हैं। दुष्प्रचार की रणनीतियाँ अक्सर लोकतांत्रिक विमर्श की निष्पक्षता को कमज़ोर करती हैं जिससे नागरिकों की निर्णय क्षमता और मताधिकार की स्वतंत्रता प्रभावित होती है। अध्ययन का मुख्य उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि कैसे मीडिया का यह नया स्वरूप सत्य नैतिकता और लोकतंत्र के मूल्यों को चुनौती देता है और किस प्रकार समाज में सत्यापन और मीडिया साक्षरता की आवश्यकता पहले से अधिक बढ़ गई है। मुख्य शब्द: फेक न्यूज़ राजनीतिक प्रचार जनमत लोकतांत्रिक विमर्श डिजिटल मीडिया सत्यापन