शिक्षा में परिवर्तन से सिक्र् भािर् र्क: नई शिक्षा नीतर् के प्रभाव औि उपलब्धियााँ
Author(s): राज कुमार शर्माAbstract
भारत की शिक्षा प्रणाली सदैव परिवर्तनशील रही है परंतु 21वीं सदी के तीसरे दशक में जो परिवर्तन नई शिक्षा नीति 2020 के माध्यम से सामने आया वह भारतीय शिक्षा के इतिहास में सबसे व्यापक और दूरगामी सुधार के रूप में देखा जा सकता है। इस नीति ने शिक्षा को केवल ज्ञानार्जन का माध्यम न मानकर उसे राष्ट्रनिर्माण आर्थिक विकास और सामाजिक सशक्तिकरण का आधार स्तंभ घोषित किया। 2020 से 2025 तक के पाँच वर्षों में इस नीति के क्रियान्वयन ने भारत के शिक्षण अनुसंधान प्रबंधन और नवाचार के क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रभाव डाला। इस अवधि में शिक्षा व्यवस्था ने डिजिटल क्रांति कौशल-आधारित शिक्षण और स्थानीय-वैश्विक एकीकरण के माध्यम से अपने स्वरूप को नया आकार दिया। यही कारण है कि आज भारत शिक्षा के क्षेत्र में ‘लोकल से ग्लोबल’ की दिशा में अग्रसर होकर सशक्त राष्ट्र बनने की ओर अग्रसर है। नई शिक्षा नीति 2020 ने शिक्षा के सभी स्तरों—प्राथमिक माध्यमिक और उच्च—पर संरचनात्मक बदलाव लाए। 5+3+3+4 की नई संरचना ने बाल्यावस्था शिक्षा को औपचारिक व्यवस्था से जोड़ा जिससे बच्चों में सीखने की क्षमता का वैज्ञानिक विकास हुआ। मातृभाषा में शिक्षण बहुभाषिकता और संस्कृति-आधारित शिक्षा के माध्यम से यह नीति भारतीयता की जड़ों को मज़बूत करते हुए वैश्विक दृष्टिकोण प्रदान करती है। शिक्षा का यह भारतीय मॉडल ‘ज्ञान और कौशल के संगम’ पर आधारित है जो आत्मनिर्भर भारत की मूल परिकल्पना से जुड़ा हुआ है।