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भारतीय लोकतंत्र के समकालीन स्वरूप का विश्लेषणात्मक अध्ययन
Author(s): Ravi Gupta

Abstract
भारतीय लोकतंत्र विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में निरंतर विकासशील है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से भारत ने लोकतांत्रिक परंपराओं को न केवल स्थापित किया बल्कि उन्हें समयानुकूल रूप से विस्तारित भी किया। इस शोध-पत्र का उद्देश्य भारतीय लोकतंत्र के समकालीन स्वरूप का विश्लेषण करना है—जिसमें संवैधानिक संरचना राजनीतिक संस्कृति सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन मीडिया की भूमिका और जनसहभागिता जैसे आयामों का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि भारतीय लोकतंत्र की सफलता केवल संस्थागत ढाँचों पर निर्भर नहीं बल्कि नागरिकों की लोकतांत्रिक चेतना सहिष्णुता और सहभागिता पर आधारित है। वैश्वीकरण डिजिटल क्रांति तथा जनसंख्या विविधता के बीच लोकतंत्र निरंतर नई चुनौतियों और संभावनाओं से गुजर रहा है।