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भारतीय शासन व्यवस्था में नीति आयोग की भूमिका का विश्लेषण
Author(s): Anshu Jajoriya

Abstract
भारत के प्रशासनिक ढांचे में नीति आयोग का गठन एक ऐतिहासिक सुधार के रूप में देखा जा सकता है। 2015 में योजना आयोग के स्थान पर स्थापित इस संस्थान ने विकास की प्रक्रिया को केंद्रीकृत नियोजन से सहभागी संघवाद की दिशा में मोड़ दिया। नीति आयोग का उद्देश्य केवल संसाधनों का आवंटन करना नहीं बल्कि दीर्घकालिक दृष्टि से देश के समग्र और समावेशी विकास के लिए नीति-निर्माण समन्वय और राज्यों के बीच सहयोग को सुदृढ़ करना है। यह शोध-पत्र नीति आयोग की संरचना कार्य-प्रणाली उपलब्धियों और सीमाओं का समग्र विश्लेषण प्रस्तुत करता है। इसमें यह समझने का प्रयास किया गया है कि नीति आयोग किस प्रकार केंद्र-राज्य संबंधों को नए आयाम देता है और भारत को सहकारी संघवाद की दिशा में अग्रसर करता है। अध्ययन से यह निष्कर्ष निकलता है कि नीति आयोग ने भारतीय शासन व्यवस्था में परामर्श-आधारित विकास संस्कृति को जन्म दिया है परंतु इसे और प्रभावी बनाने के लिए संस्थागत स्वतंत्रता पारदर्शिता और नीति के अनुश्रवण की आवश्यकता बनी हुई है।