भारतीय इतिहास लेखन में राष्ट्रीय दृष्टिकोण का उद्भव
Author(s): Arujn ShikhawatAbstract
यह शोध पत्र भारतीय इतिहास लेखन में राष्ट्रीय दृष्टिकोण के उद्भव और विकास का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है। यह औपनिवेशिक काल के दौरान भारतीय इतिहास की राष्ट्रवादी व्याख्या की आवश्यकता इसके प्रमुख विचारकों और इस दृष्टिकोण द्वारा भारतीय समाज और राजनीति पर पड़े प्रभावों की पड़ताल करता है। यह पत्र राष्ट्रीय दृष्टिकोण के विभिन्न आयामों इसकी शक्तियों और सीमाओं का भी आलोचनात्मक मूल्यांकन करता है साथ ही समकालीन इतिहास लेखन पर इसके स्थायी प्रभावों पर भी प्रकाश डालता है।