भारतीय सामाजिक-आजथिक नीजत में दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद का व्यावहाररक अनुप्रयोग
Author(s): डॉ मुकेश शुक्लाAbstract
दीनदयाल उपाध्याय द्वारा प्रतिपातदि ‘एकात्म मानववाद ’ भारिीय सामातिक-आतथिक त िंिन की एक अतद्विीय और मौतलक तव ारधारा है िो मानव-कें तिि तवकास सािंस्कृ तिक आत्मबोध तवकें िीकृ ि अथिव्यवस्था और समाि के सवाांगीण सिंिुतलि तवकास पर आधाररि है। यह दर्िन व्यक्ति समाि और प्रकृ ति के बी समन्वय स्थातपि करिे हुए एक ऐसी तवकास प्रणाली की वकालि करिा है तिसमें मानवीय गररमा सामातिक न्माय और आतथिक समरसिा को प्राथतमकिा दी िाए। समकालीन भारि में बढ़िी आतथिक असमानिा सािंस्कृ तिक तवच्चेदन र्हरी-ग्रामीण असिंिुलन और उपभोिावादी िीवन-र्ैली के दबाव के बी एकात्म मानववाद तिर से प्रासिंतगक हो उठा है। यह अध्ययन भारिीय सामातिक-आतथिक नीति में एकात्म मानववाद के व्यावहाररक अनुप्रयोगोिं को तवश्लेतिि करिा है और यह िािं िा है तक कै से यह तसद्ािंि भारि के वििमान तवकास मॉडल को अतधक मानवीय समावेर्ी और स्थायी तदर्ा प्रदान कर सकिा है। अध्ययन में यह भी स्पष्ट तकया गया है तक यह दर्िन के वल एक वैकक्तिक मॉडल नही िं बक्ति भारिीय परिं परा सिंस्कृ ति अथित िंिन और सामातिक सिंर ना का स्वाभातवक तवस्तार है। समावेर्ी तवकास अिंत्योदय ग्राम स्वराज्य स्वदेर्ी अथिनीति रोिगार-मुखी तवकास सामातिक प िंिी स्थानीय स्वर्ासन और समुदाय-कें तिि नीति तनमािण—ये सभी ित्व एकात्म मानववाद के व्यावहाररक स्वरूप को आधुतनक नीति-पररदृश्य में स्थातपि करिे हैं।