सामाजिक जिज्ञान में बहुजिषयक अध्ययन का महत्व
Author(s): Dr. Amit KumarAbstract
समकालीन सामाजिक यथाथथ की िजिलता बहुस्तरीयता और तीव्र पररवतथनशीलता ने सामाजिक जवज्ञान के अध्ययन- अजिगम की पारंपररक सीमाओं को अपयाथप्त जसद्ध कर जिया है। सामाजिक समस्याएँ अब के वल जकसी एक अनुशासन की पररजि में समझी और सुलझाई नही ंिा सकतीं क्ोजंक समाि के प्रत्येक पक्ष—आजथथक रािनीजतक सांस्कृ जतक मनोवैज्ञाजनक शैजक्षक और पयाथवरणीय—एक-िूसरे से गहराई से िुडे हुए हैं। इस संिर्थ में बहुजवषयक अध्ययन की अविारणा सामाजिक जवज्ञान में एक सशक्त बौद्धद्धक दृजिकोण के रूप में उर्रती है िो जवजर्न्न जवषयों के जसद्धांतों जवजियों और दृजियों को एकीकृ त करके सामाजिक यथाथथ की समग्र व्याख्या प्रस्तुत करती है। यह शोि- पत्र सामाजिक जवज्ञान में बहुजवषयक अध्ययन के महत्व उसकी वैचाररक पृष्ठर्ूजम उसकी आवश्यकता तथा उसके प्रर्ावों का गहन जवश्लेषण करता है। सार रूप में यह कहा िा सकता है जक बहुजवषयक अध्ययन न के वल सामाजिक समस्याओं की िडों तक पहुँचने में सहायक है बद्धि यह नीजत-जनमाथण सामाजिक जवकास और लोकतांजत्रक चेतना के सुदृढीकरण में र्ी जनणाथयक र्ूजमका जनर्ाता है। इस अध्ययन का उद्देश्य यह स्पि करना है जक सामाजिक जवज्ञान में बहुजवषयक दृजिकोण को अपनाए जबना न तो समाि की समग्र समझ संर्व है और न ही उसके जलए प्रर्ावी समािान जवकजसत जकए िा सकते हैं।