भारतीय लोकतंत्र में समग्र दृष्टिकोण और सामाष्टिक चेतना
Author(s): Dr. Ravi PrakashAbstract
भारतीय लोकतंत्र के वल एक राजनीततक व्यवस्था नही ंहै बल्कि यह एक व्यापक सामातजक सांस्कृ ततक और नैततक चेतना का प्रतततनतित्व करता है। भारत जैसे तवतविताओं से पररपूर्ण देश में लोकतंत्र का स्वरूप के वल संवैिातनक ढााँचे तक सीतमत नही ं रह सकता बल्कि उसका वास्ततवक आिार समाज की समग्र दृति और सामातजक चेतना में तनतहत होता है। समग्र दृतिकोर् का अथण है समाज के प्रत्येक वर्ण तवचार संस्कृ तत भाषा िमण और क्षेत्र को एक साझा मानवीय दृति से देखना तथा लोकतांतत्रक मूल्ो ं को के वल सत्ता-संरचना तक सीतमत न रखकर सामातजक जीवन के प्रत्येक स्तर पर स्थातपत करना। सामातजक चेतना लोकतंत्र की आत्मा है क्ोतं क तबना जार्रूक संवेदनशील और सतिय समाज के लोकतंत्र के वल औपचाररक व्यवस्था बनकर रह जाता है।