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भारतीय समाज में संस्कृ तत राजनीतत और अर्थव्यवस्र्ा का अंतसंबंध
Author(s): Dr. Sandeep Singh

Abstract
भारतीय समाज एक प्राचीन बहुस्तरीय और बहुसाांस्कृ ततक समाज है तजसकी सांरचना के वल सामातजक सांबांध ां तक सीतमत नही ां है बल्कि उसमें सांस्कृ तत राजनीतत और अर्थव्यवस्र्ा का गहरा और जतिल अांतसंबांध तवद्यमान है। भारतीय समाज की तवशेषता यह रही है तक यहााँ साांस्कृ ततक परांपराएाँ राजनीततक सत्ता और आतर्थक गतततवतधय ांक तनरां तर प्रभातवत करती रही हैं और सार् ही राजनीतत एवां अर्थव्यवस्र्ा ने भी सांस्कृ तत के स्वरूप क समय-समय पर पुनगथतित तकया है। यह श ध-पत्र भारतीय समाज में सांस्कृ तत राजनीतत और अर्थव्यवस्र्ा के इसी पारस्पररक सांबांध का गहन तवश्लेषण प्रस्तुत करता है। अध्ययन का मुख्य उद्देश्य यह स्पष्ट करना है तक ये तीन ां क्षेत्र स्वतांत्र रूप से नहीां बल्कि परस्पर आतित और अांतसंबद्ध रूप में कायथ करते हैं। साांस्कृ ततक मूल्य राजनीततक तवचारधाराओ ांऔर नीततय ांक तिशा िेते हैं राजनीतत आतर्थक सांसाधन ांके तवतरण और तनयांत्रण क तनधाथररत करती है तर्ा अर्थव्यवस्र्ा साांस्कृ ततक व्यवहार और राजनीततक शल्कि सांरचनाओां क प्रभातवत करती है। इस श ध में यह तकथ प्रस्तुत तकया गया है तक भारतीय समाज क समग्र रूप में समझने के तलए सांस्कृ तत राजनीतत और अर्थव्यवस्र्ा क पृर्क-पृर्क नहीां बल्कि एक सांयुि ढााँचे के रूप में िेखना आवश्यक है।