वैश्वीकरण के युग में समग्र सामाजिक ज िंतन
Author(s): Dr. Manoj YadavAbstract
वैश्वीकरण का युग आधुनिक मािव समाज के इनिहास में एक महत्वपूणण पररविणिकारी चरण के रूप में उभरकर सामिे आया है। इस युग िे नवश्व के नवनभन्न समाज ों सोंस्कृ निय ों अर्णव्यवस्र्ाओ ोंऔर राजिीनिक सोंरचिाओ ोंक आपस में गहरे स्तर पर ज ड़ निया है। पररणामस्वरूप सामानजक जीवि के प्रत्येक क्षेत्र में व्यापक पररविणि िेखिे क नमले हैं। वैश्वीकरण िे जहााँ एक ओर ज्ञाि िकिीक सोंचार और अवसर ों के नवस्तार क सोंभव बिाया है वही ों िूसरी ओर सामानजक असमाििाओों साोंस्कृ निक सोंकट ों और वैचाररक द्वोंद्व ों क भी ज???? निया है। ऐसे पररवनिणि सामानजक पररदृश्य में समग्र सामानजक नचोंिि का महत्व अत्यनधक बढ़ गया है। समग्र सामानजक नचोंिि का आशय समाज क उसके नवनभन्न आयाम —ों आनर्णक राजिीनिक साोंस्कृ निक िैनिक और मि वैज्ञानिक—के सार् एकीकृ ि रूप में समझिे से है। यह श ध-पत्र वैश्वीकरण के सोंिभण में समग्र सामानजक नचोंिि की आवश्यकिा उसकी वैचाररक पृष्ठभूनम और सामानजक महत्व का गहि नवश्लेषण प्रस्तुि करिा है। अध्ययि का निष्कषण यह सोंके ि िेिा है नक वैश्वीकरण के युग में समाज की जनटल समस्याओों क समझिे और समाधाि की निशा में आगे बढ़िे के नलए समग्र सामानजक नचोंिि अनिवायण ह गया है।