सामाजिक जिज्ञान अनुसंधान में समग्र दृजिकोण की आिश्यकता
Author(s): Dr. Ritu MalhotraAbstract
समकालीन समाज की संरचना अत्यंत जटिल बहुआयामी और टनरंतर पररवततनशील होती जा रही है। सामाटजक जीवन के टवटवध पक्ष—आटथतक पररस्थथटतयााँ राजनीटतक प्रटियाएाँ सांस्कृ टतक मूल्य सामाटजक संथथाएाँ ऐटतहाटसक अनुभव तथा मानवीय व्यवहार—आपस में गहराई से जुडे हुए हैं। ऐसी स्थथटत में सामाटजक टवज्ञान अनुसंधान के टलए टकसी एक टवषय या एक दृटिकोण पर आधाररत अध्ययन समाज की वास्तटवकता को पूरी तरह समझने में सक्षम नही ं रह गया है। प्रस्तुत शोध-पत्र सामाटजक टवज्ञान अनुसंधान में समग्र दृटिकोण की आवश्यकता को कें द्र में रखकर यह स्पि करने का प्रयास करता है टक समाज की जटिल समस्याओं को समझने और उनके समाधान की टिशा टनधातररत करने के टलए समस्ित व्यापक और बहुआयामी दृटि क्ो ं अटनवायत है। सार रूप में यह अध्ययन इस टनष्कषत तक पहुाँचता है टक समग्र दृटिकोण सामाटजक टवज्ञान अनुसंधान को के वल सैद्ांटतक गहराई ही नही ं प्रिान करता बस्ि उसे समाजोपयोगी यथाथतपरक और उत्तरिायी भी बनाता है।