भारतीय परंपरा में समग्र ज्ञान की अवधारणा
Author(s): Dr. Vikram ChauhanAbstract
भारतीय परंपरा में ज्ञान की अवधारणा सदैव समग्र एकात्म और जीवन-सापेक्ष रही है। यहााँ ज्ञान को के वल बौद्धिक सूचना या ववषयगत दक्षता के रूप में नही ं देखा गया बद्धि उसे मनुष्य के संपूणण अद्धित्व से जोड़कर समझा गया है। भारतीय वचंतन परंपरा में ज्ञान का उद्देश्य के वल बाह्य जगत को समझना नहीं बद्धि आत्मबोध सामावजक समरसता और नैवतक जीवन की स्थापना भी रहा है। वेद उपवनषद दर्णन स्मृवत ग्रंथ भद्धि सावहत्य और लोक परंपराएाँ —सभी में ज्ञान को र्रीर मन बुद्धि और आत्मा के संतुवलत ववकास से जोड़ा गया है। इस र्ोध-पत्र में भारतीय परंपरा में समग्र ज्ञान की अवधारणा का गहन ववश्लेषण वकया गया है तथा यह स्पष्ट करने का प्रयास वकया गया है वक यह अवधारणा वकस प्रकार व्यद्धि समाज और संस्कृ वत के समद्धित ववकास का आधार रही है। सार रूप में यह कहा जा सकता है वक भारतीय ज्ञान परंपरा में समग्रता के वल ववचार नहीं बद्धि जीवन-पिवत है जो आधुवनक युग में भी अत्यंत प्रासंवगक प्रतीत होती है।