समग्र ज्ञान और सामाजिक पररवर्तन: एक जवश्लेषणात्मक अध्ययन
Author(s): Dr. Shalini MishraAbstract
समग्र ज्ञान की अवधारणा मानव सभ्यता के बौद्धिक ववकास की एक महत्वपूणण पररणवत है जो ज्ञान को खंडो ं में ववभावजत करने के बजाय उसे एक समद्धित और व्यापक दृवि से देखने का आग्रह करती है। आधुवनक समाज में सामावजक पररवतणन की प्रविया अत्यंत जविल बहुआयामी और तीव्र गवत से संचावलत हो रही है। आवथणक संरचनाओं में बदलाव राजनीवतक चेतना का ववस्तार सामावजक आंदोलनो ं की सवियता सांस्कृ वतक मूल्ो ं का पुनगणठन और तकनीकी ववकास ने समाज के स्वरूप को वनरंतर रूपांतररत वकया है। ऐसे पररवेश में सामावजक पररवतणन को के वल वकसी एक दृविकोण से समझना अपयाणप्त वसि होता है। प्रस्तुत शोध-पत्र समग्र ज्ञान और सामावजक पररवतणन के बीच ववद्यमान अंतसंबंधो ं का ववश्लेषणात्मक अध्ययन प्रस्तुत करता है। इसमें यह स्पि करने का प्रयास वकया गया है वक समग्र ज्ञान वकस प्रकार सामावजक यथाथण की गहन समझ ववकवसत करता है और सामावजक पररवतणन की वदशा गवत तथा प्रकृ वत को प्रभाववत करता है। यह अध्ययन इस वनष्कषण की ओर संके त करता है वक समग्र ज्ञान न के वल सामावजक पररवतणन को समझने का साधन है बद्धि वह स्वयं सामावजक पररवतणन का एक सशक्त प्रेरक तत्व भी है।