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गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों का सामाजिक प्रभाव
Author(s): Dr. Reena Srivastava

Abstract
गरीबी किसी भी समाज की सबसे जटिल और बहुआयामी समस्या मानी जाती है जो केवल आर्थिक अभाव तक सीमित नहीं रहती बल्कि सामाजिक बहिष्करण अवसरों की असमान उपलब्धता शिक्षा और स्वास्थ्य की कमी तथा मानवीय गरिमा के ह्रास से भी गहराई से जुड़ी होती है। विशेष रूप से विकासशील देशों में गरीबी सामाजिक संरचना को प्रभावित करने वाला एक केंद्रीय तत्व बन जाती है। भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण समाज में गरीबी का स्वरूप ऐतिहासिक जातिगत लैंगिक और क्षेत्रीय असमानताओं से निर्मित हुआ है। स्वतंत्रता के पश्चात भारतीय राज्य ने गरीबी को राष्ट्रीय विकास की सबसे बड़ी चुनौती के रूप में स्वीकार किया और इसे कम करने के लिए अनेक गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों की शुरुआत की। इस शोध-पत्र का उद्देश्य भारत में लागू विभिन्न गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों के सामाजिक प्रभावों का गहन विश्लेषण करना है। अध्ययन यह समझने का प्रयास करता है कि इन कार्यक्रमों ने समाज में रोजगार सामाजिक सुरक्षा शिक्षा स्वास्थ्य लैंगिक समानता और सामाजिक समावेशन के क्षेत्रों में किस प्रकार परिवर्तन उत्पन्न किए हैं। साथ ही यह भी विश्लेषण किया गया है कि इन कार्यक्रमों की सीमाएँ क्या हैं और किन कारणों से अपेक्षित सामाजिक परिवर्तन पूरी तरह साकार नहीं हो पाए हैं। शोध-पत्र इस निष्कर्ष पर पहुँचता है कि गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों ने समाज में सकारात्मक सामाजिक बदलाव की नींव रखी है किंतु इनके प्रभाव को स्थायी और व्यापक बनाने के लिए संरचनात्मक सुधार और प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता है।