सामाजिक अनुसंधान में गुणात्मक और मात्रात्मक पद्धतियाँ
Author(s): डॉ. मीना गोपालAbstract
सामाजिक अनुसंधान मानव समाज उसकी संरचनाओं संबंधों संस्थाओं तथा सामाजिक प्रक्रियाओं को वैज्ञानिक ढंग से समझने का एक सशक्त माध्यम है। सामाजिक वास्तविकताओं की जटिलता के कारण अनुसंधान की विधियों का चयन अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है। इस संदर्भ में गुणात्मक एवं मात्रात्मक पद्धतियाँ सामाजिक अनुसंधान की दो प्रमुख और व्यापक रूप से प्रयुक्त पद्धतियाँ हैं। मात्रात्मक पद्धति सामाजिक तथ्यों को संख्यात्मक रूप में मापने तुलनात्मक विश्लेषण करने तथा सामान्यीकरण स्थापित करने में सहायक होती है जबकि गुणात्मक पद्धति सामाजिक अनुभवों अर्थों भावनाओं एवं संदर्भों की गहन समझ प्रदान करती है। प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य सामाजिक अनुसंधान में इन दोनों पद्धतियों की अवधारणात्मक पृष्ठभूमि विशेषताओं प्रक्रियाओं उपयोगिता सीमाओं तथा परस्पर पूरकता का विस्तृत विश्लेषण करना है। यह अध्ययन यह स्पष्ट करता है कि आधुनिक सामाजिक अनुसंधान में किसी एक पद्धति पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है बल्कि शोध की प्रकृति के अनुसार दोनों पद्धतियों का समन्वित उपयोग अधिक प्रभावी एवं प्रामाणिक परिणाम प्रदान कर सकता है।