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भारत में शिक्षा और सामाजिक गतिशीलता
Author(s): डॉ. पी. सनल मोहन

Abstract
भारत जैसे बहुस्तरीय और सामाजिक रूप से विविध देश में शिक्षा को सामाजिक गतिशीलता का सबसे प्रभावी साधन माना गया है। सामाजिक गतिशीलता से आशय समाज में व्यक्ति या समूह की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में होने वाले ऊर्ध्व या क्षैतिज परिवर्तन से है जिसमें शिक्षा निर्णायक भूमिका निभाती है। स्वतंत्रता के बाद भारत ने सार्वभौमिक शिक्षा साक्षरता अभियान उच्च शिक्षा विस्तार आरक्षण नीति छात्रवृत्ति योजनाएँ तथा डिजिटल शिक्षा जैसे अनेक प्रयास किए हैं ताकि परंपरागत असमानताओं को कम किया जा सके। इसके बावजूद जाति वर्ग लिंग क्षेत्रीय असमानता और आर्थिक विषमता आज भी शिक्षा की पहुँच और गुणवत्ता को प्रभावित करती हैं। यह शोध पत्र भारत में शिक्षा और सामाजिक गतिशीलता के अंतर्संबंधों का सैद्धांतिक एवं विश्लेषणात्मक अध्ययन प्रस्तुत करता है। इसमें यह विश्लेषित किया गया है कि किस प्रकार प्राथमिक माध्यमिक और उच्च शिक्षा सामाजिक उन्नयन का मार्ग प्रशस्त करती है तथा किन संरचनात्मक बाधाओं के कारण शिक्षा समान रूप से सामाजिक गतिशीलता उत्पन्न नहीं कर पा रही है। यह अध्ययन नीतिगत सुधारों समावेशी शिक्षा मॉडल और सामाजिक न्याय आधारित शैक्षिक ढाँचे की आवश्यकता को रेखांकित करता है।