सोशल मीडिया ट्रायल और न्याय व्यवस्था पर उसका प्रभाव
Author(s): Prof. Sushmita PatiAbstract
वर्तमान डिजिटल युग में सोशल मीडिया केवल संवाद और अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं रह गया है बल्कि यह जनमत निर्माण सामाजिक विमर्श तथा न्यायिक प्रक्रियाओं को प्रभावित करने वाला एक सशक्त उपकरण बन चुका है। विशेष रूप से ‘सोशल मीडिया ट्रायल’ की अवधारणा ने न्याय व्यवस्था के समक्ष नई चुनौतियाँ प्रस्तुत की हैं जहाँ किसी भी आरोपित व्यक्ति को न्यायालय के निर्णय से पूर्व ही सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर दोषी या निर्दोष घोषित कर दिया जाता है। यह प्रवृत्ति न केवल न्यायिक निष्पक्षता के सिद्धांत को चुनौती देती है बल्कि संविधान द्वारा प्रदत्त ‘निष्पक्ष सुनवाई’ और ‘निर्दोषता की अनुमानित धारणा’ जैसे मूलभूत सिद्धांतों को भी प्रभावित करती है। इस शोध का उद्देश्य सोशल मीडिया ट्रायल की प्रकृति उसकी उत्पत्ति उसके सामाजिक-राजनीतिक संदर्भ तथा न्यायिक प्रक्रिया पर उसके प्रभाव का समग्र विश्लेषण करना है। अध्ययन यह समझने का प्रयास करता है कि किस प्रकार डिजिटल प्लेटफॉर्म पर वायरल सामग्री भावनात्मक प्रतिक्रियाएँ और अप्रमाणित सूचनाएँ न्यायिक निर्णयों के वातावरण को प्रभावित करती हैं। यह शोध न्यायपालिका मीडिया नागरिक समाज और राज्य की भूमिकाओं का तुलनात्मक अध्ययन करते हुए समाधानात्मक सुझाव भी प्रस्तुत करता है ताकि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और न्यायिक निष्पक्षता के बीच संतुलन स्थापित किया जा सके।