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डिजिटल थकान और सामाजिक जीवन पर उसका प्रभाव
Author(s): Prof. Mridula Mukherjee

Abstract
आधुनिक युग में डिजिटल तकनीक ने मानव जीवन के लगभग हर क्षेत्र को प्रभावित किया है। इंटरनेट स्मार्टफोन सोशल मीडिया और ऑनलाइन कार्यप्रणालियों के विस्तार ने जीवन को सरल तो बनाया है किंतु इसके साथ ही एक नई समस्या डिजिटल थकान भी उत्पन्न हुई है। डिजिटल थकान से आशय उस मानसिक शारीरिक और भावनात्मक थकावट से है जो लंबे समय तक स्क्रीन के सामने रहने निरंतर सूचना के प्रवाह और ऑनलाइन संचार के दबाव के कारण उत्पन्न होती है। यह शोध-पत्र डिजिटल थकान की प्रकृति कारणों और विशेष रूप से सामाजिक जीवन पर इसके प्रभाव का विश्लेषण करता है। अध्ययन में पाया गया है कि डिजिटल थकान व्यक्ति की सामाजिक सहभागिता को कम करती है वास्तविक संबंधों को कमजोर करती है और अकेलेपन की भावना को बढ़ाती है। इसके अतिरिक्त यह मानसिक स्वास्थ्य पारिवारिक संबंधों और सामाजिक समरसता पर भी नकारात्मक प्रभाव डालती है। इस शोध में गुणात्मक पद्धति का उपयोग करते हुए विभिन्न आयु वर्गों के अनुभवों का विश्लेषण किया गया है। निष्कर्षतः यह कहा जा सकता है कि डिजिटल साधनों का संतुलित उपयोग ही सामाजिक जीवन की गुणवत्ता को बनाए रखने में सहायक हो सकता है।