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आधुनिक समाज में समय प्रबंधन और सामाजिक असंतुलन
Author(s): Prof. Harpreet Singh

Abstract
आधुनिक समाज में समय प्रबंधन एक अत्यंत महत्वपूर्ण और जटिल विषय के रूप में उभर कर सामने आया है। तकनीकी विकास वैश्वीकरण और प्रतिस्पर्धात्मक जीवन शैली ने व्यक्ति के दैनिक जीवन को अत्यधिक व्यस्त और असंतुलित बना दिया है। इस शोध-पत्र का मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि समय प्रबंधन की कमी किस प्रकार सामाजिक असंतुलन को जन्म देती है तथा इसका प्रभाव व्यक्ति परिवार और समाज पर किस प्रकार पड़ता है। आज का मनुष्य समय के अभाव से जूझ रहा है जिसके कारण मानसिक तनाव पारिवारिक विघटन सामाजिक दूरी और नैतिक मूल्यों का ह्रास जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं। इस शोध में यह भी विश्लेषण किया गया है कि किस प्रकार उचित समय प्रबंधन से इन समस्याओं को नियंत्रित किया जा सकता है और सामाजिक संतुलन स्थापित किया जा सकता है। अध्ययन में गुणात्मक दृष्टिकोण अपनाया गया है जिसमें विभिन्न सामाजिक तथ्यों पूर्व शोधों और अनुभवों का विश्लेषण किया गया है। परिणामों से यह स्पष्ट होता है कि समय प्रबंधन केवल व्यक्तिगत दक्षता का विषय नहीं है बल्कि यह सामाजिक स्थिरता और संतुलन के लिए भी अत्यंत आवश्यक है। यदि व्यक्ति अपने समय का संतुलित उपयोग करना सीख ले तो समाज में व्याप्त अनेक समस्याओं को कम किया जा सकता है और एक संतुलित एवं स्वस्थ समाज का निर्माण संभव है।