कबीर और गुरु नानक के विचारों में सामाजिक न्याय और धार्मिक सहिष्णुता
Author(s): Monu Rajak ( Research Scholar) Dr. Shashi kant Research SupervisorAbstract
भारतीय संत परंपरा में कबीर और गुरु नानक ऐसे दो महान संत-विचारक हैं जिनके चिंतन ने केवल धार्मिक क्षेत्र को ही प्रभावित नहीं किया बल्कि भारतीय समाज की सामाजिक सांस्कृतिक और राजनीतिक चेतना को भी गहराई से प्रभावित किया। मध्यकालीन भारत का सामाजिक ढाँचा गहरी असमानताओं जातिगत विभाजन धार्मिक कट्टरता और सामाजिक शोषण से प्रभावित था। समाज में ऊँच-नीच की भावना इतनी गहरी हो चुकी थी कि मनुष्य की पहचान उसके कर्मों के आधार पर नहीं बल्कि उसके जन्म और जाति के आधार पर निर्धारित की जाती थी। धार्मिक जीवन भी अपने मूल स्वरूप से भटककर कर्मकांड पाखंड और बाहरी आडंबरों तक सीमित हो गया था। ऐसे समय में कबीर और गुरु नानक ने अपने विचारों और शिक्षाओं के माध्यम से समाज को एक नई दिशा प्रदान की। दोनों संतों ने मानवता समानता प्रेम सहिष्णुता और नैतिकता पर आधारित समाज की कल्पना प्रस्तुत की। प्रस्तुत शोध पत्र का उद्देश्य कबीर और गुरु नानक के विचारों में सामाजिक न्याय और धार्मिक सहिष्णुता की अवधारणाओं का विश्लेषण करना है तथा यह स्पष्ट करना है कि उनके विचार आज के समाज के लिए किस प्रकार प्रासंगिक हैं।