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ग्रामीण भारत में महिला स्वावलंबन और डिजिटल सशक्तिकरण
Author(s): Prof. Poonam Shah

Abstract
इक्कीसवीं शताब्दी में डिजिटल तकनीक ने भारतीय समाज की सामाजिक आर्थिक और सांस्कृतिक संरचना को गहराई से प्रभावित किया है। विशेष रूप से ग्रामीण भारत में डिजिटल माध्यमों का विस्तार महिलाओं के जीवन में महत्वपूर्ण परिवर्तन लेकर आया है। पहले जहाँ ग्रामीण महिलाएँ शिक्षा आर्थिक अवसरों सामाजिक भागीदारी और सूचना तक सीमित पहुँच के कारण आत्मनिर्भरता से दूर थीं वहीं आज डिजिटल तकनीक मोबाइल फोन इंटरनेट ऑनलाइन बैंकिंग ई-कॉमर्स और सरकारी डिजिटल योजनाओं ने उनके लिए नए अवसरों के द्वार खोले हैं। डिजिटल सशक्तिकरण ने महिलाओं को केवल तकनीकी ज्ञान ही नहीं दिया बल्कि आत्मविश्वास आर्थिक स्वतंत्रता सामाजिक पहचान और निर्णय लेने की क्षमता भी प्रदान की है। स्वयं सहायता समूहों ऑनलाइन प्रशिक्षण डिजिटल भुगतान प्रणाली और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने ग्रामीण महिलाओं को उद्यमिता शिक्षा स्वास्थ्य जागरूकता और सामाजिक नेतृत्व से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके साथ ही डिजिटल विभाजन तकनीकी अशिक्षा सामाजिक रूढ़ियाँ इंटरनेट की सीमित उपलब्धता और लैंगिक असमानता जैसी चुनौतियाँ भी सामने आती हैं। यह शोध पत्र ग्रामीण भारत में महिला स्वावलंबन और डिजिटल सशक्तिकरण के सामाजिक प्रभावों का अध्ययन करता है तथा यह समझने का प्रयास करता है कि डिजिटल तकनीक किस प्रकार ग्रामीण महिलाओं के जीवन में परिवर्तन का माध्यम बन रही है। अध्ययन का उद्देश्य महिला सशक्तिकरण के सामाजिक आर्थिक और सांस्कृतिक आयामों को समझना तथा डिजिटल युग में ग्रामीण महिलाओं की बदलती भूमिका का समाजशास्त्रीय विश्लेषण प्रस्तुत करना है।