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अंबेडकर की दृष्टि में संघ सामाजिक न्याय और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद
Author(s): Mani Sagar

Abstract
अंबेडकर का चिंतन भारतीय समाज राजनीति और संस्कृति पर आधारित था जिसमें समानता न्याय और सामाजिक स्वतंत्रता को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। जब हम “अंबेडकर ने संघ पर विचार” विषय पर शोध करते हैं तो यह आवश्यक हो जाता है कि हम उनके वैचारिक दृष्टिकोण उनके समय की परिस्थितियों और हिन्दू समाज सुधार के प्रति उनके दृष्टिकोण को व्यापक परिप्रेक्ष्य में समझें। डॉ. भीमराव अंबेडकर किसी भी संस्था विचारधारा या समूह को उसके सामाजिक प्रभाव और न्याय के सिद्धांतों की कसौटी पर परखते थे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का उदय जिस समय हुआ वह भारत के सामाजिक पुनर्निर्माण का काल था और अंबेडकर ने भारत के किसी भी सामाजिक संगठन का विश्लेषण इसी मूल प्रश्न पर किया कि क्या वह संगठन जातिगत अन्याय को समाप्त करने समानता स्थापित करने और सामाजिक मरसता को बढ़ावा देने में सक्षम है या नहीं। संघ के विषय में उनके विचार न तो एकतरफ़ा प्रशंसा थे और न ही पूर्ण अस्वीकार। अंबेडकर का दृष्टिकोण यह था कि यदि कोई संगठन सामाजिक समानता की दिशा में वास्तविक प्रयास करता है तो वह भारत के पुनर्निर्माण में योगदान दे सकता है परंतु यदि उसकी सामाजिक संरचना जातिगत असमानता को बनाए रखती है तो वह भारतीय समाज के लिए लाभदायक नहीं हो सकती।