समकालीन भारतीय शिक्षा व्यवस्था में बहुविषयक शिक्षण की भूमिका : एक अध्ययन
Author(s): Dr Rahul RoyAbstract
भारतीय शिक्षा व्यवस्था निरंतर परिवर्तन के दौर से गुजर रही है जिसमें ज्ञान कौशल नवाचार तथा समग्र विकास को समान रूप से महत्व दिया जा रहा है। आधुनिक समय में यह अनुभव किया गया है कि केवल विषय विशेष का ज्ञान विद्यार्थियों को जीवन की जटिल चुनौतियों का सामना करने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसी कारण बहुविषयक शिक्षण की अवधारणा ने शिक्षा जगत में विशेष महत्व प्राप्त किया है। बहुविषयक शिक्षण ऐसी शिक्षण पद्धति है जिसमें विभिन्न विषयों के ज्ञान कौशल एवं अनुभवों को एकीकृत करते हुए विद्यार्थियों को व्यापक एवं व्यावहारिक शिक्षा प्रदान की जाती है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों में तार्किक चिंतन समस्या समाधान क्षमता रचनात्मकता नवाचार संचार कौशल तथा निर्णय लेने की क्षमता का विकास होता है। प्रस्तुत अध्ययन का उद्देश्य समकालीन भारतीय शिक्षा व्यवस्था में बहुविषयक शिक्षण की भूमिका उसकी आवश्यकता उपयोगिता तथा शिक्षा की गुणवत्ता पर उसके प्रभाव का विश्लेषण करना है। अध्ययन में उपलब्ध पुस्तकों शोध पत्रों सरकारी दस्तावेजों एवं अन्य द्वितीयक स्रोतों के आधार पर विषय का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि बहुविषयक शिक्षण विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण एवं रोजगारोन्मुख शिक्षा के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।