डिजिटल युग में लोकस्मृतियों का संरक्षण: सोशल मीडिया और सांस्कृतिक पहचान का समाजशास्त्रीय अध्ययन
Author(s): RachitAbstract
डिजिटल युग ने मानव जीवन के लगभग प्रत्येक क्षेत्र को प्रभावित किया है जिसमें संस्कृति परंपरा और लोकस्मृतियाँ भी शामिल हैं। लोकस्मृतियाँ किसी समाज की ऐतिहासिक चेतना सामूहिक अनुभवों रीति-रिवाजों लोककथाओं लोकगीतों और सांस्कृतिक मूल्यों का महत्वपूर्ण स्रोत होती हैं। पहले इनका संरक्षण मुख्यतः मौखिक परंपराओं और पारिवारिक-सामुदायिक माध्यमों से किया जाता था किन्तु आधुनिक तकनीकी विकास और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों के उदय ने इनके संरक्षण के नए अवसर प्रदान किए हैं। फेसबुक यूट्यूब इंस्टाग्राम तथा अन्य डिजिटल मंचों के माध्यम से लोकसांस्कृतिक सामग्री का व्यापक प्रसार संभव हुआ है। यह अध्ययन डिजिटल माध्यमों की भूमिका का समाजशास्त्रीय विश्लेषण प्रस्तुत करता है और यह समझने का प्रयास करता है कि सोशल मीडिया किस प्रकार लोकस्मृतियों के संरक्षण तथा सांस्कृतिक पहचान के निर्माण और पुनर्निर्माण में योगदान दे रहा है। अध्ययन यह भी रेखांकित करता है कि डिजिटल संरक्षण के साथ-साथ सांस्कृतिक प्रामाणिकता और व्यावसायीकरण जैसी चुनौतियाँ भी उभर रही हैं।