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लोकतांत्रिक शासन में ‘प्रतीक्षा’ की राजनीति: नागरिक-राज्य संबंधों का एक सैद्धांतिक अध्ययन
Author(s): Dr Ram Singh

Abstract
लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था को सामान्यतः सहभागिता समानता उत्तरदायित्व और पारदर्शिता के सिद्धांतों पर आधारित माना जाता है किंतु व्यवहारिक स्तर पर नागरिकों और राज्य के मध्य संबंधों में अनेक ऐसी प्रक्रियाएँ सक्रिय रहती हैं जो सत्ता के संचालन को प्रभावित करती हैं। इनमें ‘प्रतीक्षा’ एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और सामाजिक प्रक्रिया के रूप में उभरती है। नागरिकों को विभिन्न सरकारी सेवाओं कल्याणकारी योजनाओं न्यायिक प्रक्रियाओं प्रशासनिक निर्णयों तथा अधिकारों की प्राप्ति के लिए लंबे समय तक प्रतीक्षा करनी पड़ती है। यह प्रतीक्षा केवल समय का प्रश्न नहीं होती बल्कि यह सत्ता नियंत्रण असमानता और वैधता के निर्माण का माध्यम भी बन जाती है। प्रस्तुत अध्ययन का उद्देश्य लोकतांत्रिक शासन में प्रतीक्षा की राजनीति का सैद्धांतिक विश्लेषण करना तथा नागरिक-राज्य संबंधों पर उसके प्रभावों को समझना है। अध्ययन यह प्रतिपादित करता है कि प्रतीक्षा केवल प्रशासनिक अक्षमता का परिणाम नहीं है बल्कि अनेक बार यह सत्ता के संचालन और नागरिकों के व्यवहार को नियंत्रित करने का एक सूक्ष्म राजनीतिक उपकरण भी बन जाती है।