आधुनिक राज्य और भावनाओं का शासन: भय आशा एवं असुरक्षा के राजनीतिक आयाम
Author(s): Dr Suraj SinghAbstract
आधुनिक राज्य केवल विधिक प्रशासनिक और संस्थागत संरचनाओं के माध्यम से संचालित नहीं होता बल्कि वह नागरिकों की भावनाओं को भी प्रभावित और नियंत्रित करता है। भय आशा और असुरक्षा जैसी भावनाएँ राजनीतिक व्यवस्था के निर्माण संरक्षण और विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में आतंकवाद आर्थिक संकट महामारी युद्ध तथा सामाजिक असमानताओं ने नागरिकों के भीतर असुरक्षा की भावना को गहरा किया है। राज्य इन परिस्थितियों का उपयोग कभी सुरक्षा और स्थिरता के नाम पर अपनी वैधता को मजबूत करने के लिए करता है तो कभी आशा और विकास के वादों के माध्यम से जनसमर्थन अर्जित करता है। भावनाओं का यह राजनीतिक उपयोग लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं जनमत निर्माण और सत्ता संबंधों को गहराई से प्रभावित करता है। प्रस्तुत अध्ययन आधुनिक राज्य और भावनात्मक राजनीति के अंतर्संबंधों का विश्लेषण करता है तथा यह समझने का प्रयास करता है कि भय आशा और असुरक्षा किस प्रकार राजनीतिक शक्ति के महत्वपूर्ण साधन बन जाते हैं। यह अध्ययन समकालीन राजनीतिक विमर्श में भावनाओं की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित करता है।