डिजिटल अर्थव्यवस्था में अदृश्य श्रम: मंच-आधारित श्रमिकों के संदर्भ में लैंगिकता असुरक्षा और सामाजिक संरक्षण का अध्ययन
Author(s): Dr. AnjaliAbstract
डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार ने भारत में रोजगार के नए अवसरों के साथ श्रम के ऐसे स्वरूपों को जन्म दिया है जिनमें कार्यकर्ता डिजिटल मंचों के माध्यम से ग्राहकों कंपनियों और बाजारों से जुड़े रहते हैं। मंच-आधारित श्रम ने रोजगार में लचीलापन और प्रवेश के नए अवसर उपलब्ध कराए हैं लेकिन इसके साथ आय की अनिश्चितता सामाजिक सुरक्षा की कमी लंबे कार्य घंटे एल्गोरिद्मिक नियंत्रण और रोजगार संबंधों की अस्पष्टता जैसी समस्याएँ भी उभरी हैं। यह अध्ययन विशेष रूप से मंच-आधारित श्रमिकों के संदर्भ में लैंगिकता श्रम की अदृश्यता आर्थिक असुरक्षा और सामाजिक संरक्षण के संबंधों का समाजशास्त्रीय विश्लेषण प्रस्तुत करता है। अध्ययन द्वितीयक स्रोतों सरकारी दस्तावेजों अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठनों की रिपोर्टों तथा उपलब्ध अकादमिक साहित्य पर आधारित है। विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि डिजिटल मंच श्रम को पारंपरिक कार्यस्थल से बाहर ले जाते हैं लेकिन श्रम संबंधों की असमानताओं को समाप्त नहीं करते। महिलाओं के लिए घरेलू देखभाल सुरक्षा गतिशीलता और डिजिटल पहुँच की बाधाएँ अतिरिक्त असुरक्षा उत्पन्न करती हैं। अध्ययन निष्कर्ष निकालता है कि समावेशी डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए सामाजिक सुरक्षा पारदर्शी एल्गोरिद्मिक प्रबंधन न्यूनतम पारिश्रमिक मातृत्व संरक्षण और श्रमिक प्रतिनिधित्व आवश्यक हैं।