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स्मार्ट शहरों के दौर में शहरी हाशियाकरण: आजीविका पहचान और सार्वजनिक संसाधनों तक पहुँच का सामाजिक अध्ययन
Author(s): Dr. Sunaina Verma

Abstract
भारत में तीव्र शहरीकरण और स्मार्ट शहरों की अवधारणा ने शहरी विकास आधारभूत संरचना और सार्वजनिक सेवाओं के स्वरूप में महत्वपूर्ण परिवर्तन किए हैं। स्मार्ट शहरों का उद्देश्य तकनीक बेहतर अवसंरचना सुशासन और संसाधनों के प्रभावी उपयोग के माध्यम से जीवन की गुणवत्ता सुधारना है लेकिन इन प्रक्रियाओं का लाभ सभी शहरी समूहों तक समान रूप से नहीं पहुँचता। यह अध्ययन स्मार्ट शहरों के संदर्भ में शहरी हाशियाकरण का समाजशास्त्रीय विश्लेषण प्रस्तुत करता है और विशेष रूप से अनौपचारिक श्रमिकों प्रवासियों झुग्गी-बस्ती निवासियों तथा निम्न-आय समूहों की आजीविका पहचान और सार्वजनिक संसाधनों तक पहुँच पर ध्यान केंद्रित करता है। अध्ययन द्वितीयक स्रोतों सरकारी रिपोर्टों नीतिगत दस्तावेजों तथा शहरी समाजशास्त्र से संबंधित साहित्य पर आधारित है। विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि स्मार्ट शहरीकरण परिवहन डिजिटल सेवाओं और आधारभूत सुविधाओं में सुधार कर सकता है लेकिन भूमि मूल्यों विस्थापन डिजिटल बहिष्करण और स्थानिक असमानताओं के माध्यम से नए हाशियाकरण को भी जन्म दे सकता है। अध्ययन निष्कर्ष निकालता है कि स्मार्ट शहरों की वास्तविक सफलता तकनीकी दक्षता के बजाय सामाजिक समावेशन सुरक्षित आजीविका समान संसाधन पहुँच और सहभागी शहरी शासन से निर्धारित होनी चाहिए।